संघर्ष से शिखर तक: 7 बार फेल, पर हिम्मत नहीं हारी, 8वें प्रयास में शिक्षक बने प्रेम सिंह

संघर्ष से शिखर तक: 7 बार फेल, पर हिम्मत नहीं हारी, 8वें प्रयास में शिक्षक बने प्रेम सिंह

संघर्ष से शिखर तक: 7 बार फेल, पर हिम्मत नहीं हारी, 8वें प्रयास में शिक्षक बने प्रेम सिंह


संघर्ष से शिखर तक: 7 बार फेल, पर हिम्मत नहीं हारी, 8वें प्रयास में शिक्षक बने प्रेम सिंहविफलता आपके लक्ष्य में बाधा नहीं बन सकती। बस आपके अंदर लक्ष्य को पाने का हौसला होना चाहिए। सात बार विफल हो चुके...
विफलता आपके लक्ष्य में बाधा नहीं बन सकती। बस आपके अंदर लक्ष्य को पाने का हौसला होना चाहिए। सात बार विफल हो चुके ईटवाया के प्रेमसिंह राजपुरोहित ने आत्मविश्वास व मेहनत के बलबूते 8वें प्रयास में सफलता अर्जित कर इस बात को चरितार्थ किया है। रात को चिमनी की रोशनी में टीचर बनने का सपना संवारा और कठोर परिश्रम के साथ तैयारी में जुट गए। प्रतियोगी परीक्षाओं में उन्हें सात बार विफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिर तृतीय श्रेणी शिक्षक के रूप में प्रथम लेवल में चयन हुअा।

तुम्हारे जैसे बहुत होशियार बैठे हैं कैसे लगेगी नौकरी...!

लगातार विफलता से एकबारगी प्रेमसिंह निराश हो उठे। उधर, लगातार विफल हो रहे लोगांे का ताना देना भी शुरू कर दिया। लोगों ने प्रेमसिंह को कहा कि आज के दौर में तुम्हारे जैसे बहुत होशियार प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में रात-दिन एक कर पढ़ाई कर रहे हैं। उनका भी सलेक्शन मुश्किल से हो रहा है, तो तुम्हारा कब होगा। बस यही बात प्रेमसिंह को चुभ गई तथा दुगुनी मेहनत कर आज मुकाम हासिल किया।

घर में बिजली नहीं, चिमनी की रोशनी में अध्ययन

चयनित प्रेमसिंह मूलत: ईटवाया गांव के निवासी हैं। उनकी पारिवारिक स्थिति कमजोर है तथा कृषि कार्य से ही परिवार का भरण-पोषण चलता है। ऐसे में दिन के समय प्रेमसिंह कृषि कार्य में परिजनों के साथ हाथ बंटाते थे। शाम को घर लौटने के बाद भोजन कर पढ़ाई में जुट जाते। घर में बिजली कनेक्शन नहीं होने से रात को चिमनी की सहायता से अध्ययन कार्य करना पड़ता था। प्रेमसिंह ने बताया कि नियमित रूप से उन्होंने रात के समय चार-पांच घंटे अध्ययन किया।
Best of Hindi Thoughts,Motivational Anmol Vachan Hindi Me,Motivational Quotes in Hindi,Motivational Quotes in Hindi With Pictures,Motivational Thoughts in Hindi on Success,Quotation in Hindi,Thoughts in Hindi,Thoughts in Hindi for Students

0 Response to "संघर्ष से शिखर तक: 7 बार फेल, पर हिम्मत नहीं हारी, 8वें प्रयास में शिक्षक बने प्रेम सिंह"

Post a Comment

प्रेरकप्रसंग

latest