मोदी सरकार का बड़ा फैसला, बदलेगी शिक्षा नीति, जानिए पूरी डिटेल्स

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, बदलेगी शिक्षा नीति, जानिए पूरी डिटेल्स

मोदी सरकार का बड़ा फैसला, बदलेगी शिक्षा नीति, जानिए पूरी डिटेल्स

केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इस पर आमजन से 30 जून तक सुझाव मांगे हैं। ड्राफ्ट को मुख्यतः दो हिस्सों में बांटा गया है। स्कूल शिक्षा में पहली बार प्री स्कूल को भी शामिल किया है। इनमें आंगनबाड़ी केन्द्र, अन्य नर्सरी व प्रीपेटरी स्कूल शामिल होंगे। उनका पाठ्यक्रम भी अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) तैयार करेगी। पांचवी तक की शिक्षा मातृभाषा में दी जाएगी।
उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव के तहत कॉलेज अब किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध हुए बिना स्ववित्तपोषी आधार पर भी चल सकेंगे। इन्हें किसी विश्वविद्यालय से सम्बद्ध होने की आवश्यकता नहीं होगी। पूरे देश में शोध प्रोजेक्ट्स के लिए नेशनल शोध एजेंसी की स्थापना की जाएगी। नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट में तकनीक पर विशेष जोर दिया गया है। तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए नेशनल एजुकेशन टेक्नोलॉजी फोरम बनाया जाएगा। इसमें नए विचारों और तकनीकों का आदान-प्रदान किया जा सकेगा।
नई शिक्षा नीति में प्रोफेशनल शिक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। कोई भी विश्वविद्यालय केवल प्रोफेशनल विश्वविद्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, वरन जनरल विश्वविद्यालय भी होगा। नई केन्द्र सरकार में शिक्षा नीति के इस ड्राफ्ट को मानव संसाधन विकास मंत्रालय का 100 दिन का एक्शन प्लान भी माना जा रहा है।

ड्राफ्ट की विशेष बातें
शिक्षा में गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर पांच साल में शिक्षा नीति की योजनाओं की समीक्षा होगी। विशेषज्ञ सुधार कर कमियां दूर करेंगे।
देश के शिक्षण संस्थानों को दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संस्थानों की श्रेणी में लाने के लिए बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।
भर्ती की अधिसूचना संभवतः 30 जून को जारी कर दी जाएगी। भर्ती में राज्य सरकारों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।

शिक्षा नीति की योजनाएं 5 वर्ष के भीतर लागू करनी होंगी। इनकी विशेषज्ञ समीक्षा करेंगे।
शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ किताबी ज्ञान देना नहीं बल्कि स्किल सुधारते हुए रोजगार या व्यवसाय से जोड़ना होगा।
नई शिक्षा नीति की योजनाएं लागू करने का काम 15 अगस्त से शुरू हो जाएगा।
विषय एक्शन, समय सीमा, जवाबदेही भी तय की गई है। कोई विभाग या अधिकारी काम में ढिलाई करेगा तो कार्यवाही की जाएगी।

नए सिस्टम से लागू होगा एक्रीडिटेशन
यूजीसी को भंग करते हुए उसकी जगह हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) एक्ट-2018 लागू किया जाएगा। उच्च शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने के लिए नया एक्रिडिटेशन सिस्टम लागू किया जाएगा। इसकी घोषणा 15 अगस्त तक कर दी जाएगी। इसके बाद संस्थानों को एक्रिडिटेशन मिलने में आसानी रहेगी। अच्छे संस्थान आने से शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी।
मोदी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में किया बड़ा बदलाव, हिंदी की अनिवार्यता हुई खत्म
नई दिल्ली। सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में बदलाव कर दिया है। अब हिंदी पढ़ने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया है। संशोधित मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले के तहत छात्र अब कोई भी तीन भाषा पढ़ने के लिए स्वतंत्र होंगे। हालांकि इनमें एक साहित्यिक भाषा जरूरी होगी। पुराने मसौदे में हिंदी, अंग्रेजी के साथ कोई एक स्थानीय भाषा पढ़ने का प्रावधान था।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदे में यह बदलाव सोमवार को गैर-हिंदी भाषी प्रदेशों, खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों, से उठ रहे विरोध के सुर को देखते हुए किया गया है। इसकी शुरुआत तमिलनाडु से हुई थी, जहां द्रमुक सहित कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने में जुट गए थे।
द्रमुक के अलावा कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया, राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने भी इसका विरोध करना शुरू कर दिया था। हालांकि, सरकार ने कहा था कि किसी पर कोई भाषा थोपी नहीं जाएगी। यह अभी एक शुरुआती मसौदा है। सभी पक्षों से सलाह के बाद ही कोई फैसला किया जाएगा।
Committee on National Education Policy, National Education Policy, Human resource development minister Ramesh Pokhriyal, K. Kasturirangan committee, modi government 2 राष्ट्रीय शिक्षा नीति, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक', मोदी सरकार,

संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में त्रिभाषा फार्मूले को लचीला कर दिया गया है। अब इनमें किसी भी भाषा का जिक्र नहीं है। छात्रों को कोई भी तीन भाषा चुनने की स्वतंत्रता दी गई है। तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों में पहले से दो भाषा पढ़ाई जा रही है। इनमें एक स्थानीय और दूसरी अंग्रेजी है। हालांकि संशोधित शिक्षा नीति के मसौदे में यह साफ कहा गया है कि स्कूली छात्रों को तीन भाषा पढ़नी होगी।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति निर्धारित करने के लिए बनी कमेटी ने दिये ये बड़े सुझाव
ड्राफ्ट में राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन और निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क बढाने पर रोक लगाने जैसी सिफारिशें की है.


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD Ministry) से पाठ्यक्रम में भारतीय शिक्षा प्रणाली को शामिल करने, राष्ट्रीय शिक्षा आयोग का गठन और निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से शुल्क बढाने पर रोक लगाने जैसी सिफारिशें की है. तीन साल के पूर्वस्कूली (preschool) और चार साल के स्नातक (four-year undergraduate honours courses ) सम्मान पाठ्यक्रम एक मसौदा राष्ट्रीय शिक्षा नीति की विशेषताओं में से हैं, जो नरेंद्र मोदी सरकार को अपनी दूसरी पारी के पहले दिन प्राप्त हुई थी.

इसरो के पूर्व प्रमुख के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व वाली कमेटी द्वारा तैयार नई एनईपी का प्रारूप शुक्रवार को मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' (Human resource development minister Ramesh Pokhriyal 'Nishank') को सौंपा गया. निशंक ने शुक्रवार को ही कार्यभार संभाला है.
Latest news,all india news,job alert,textnew,alert and all over india news on textnews1.co.


0 Response to "मोदी सरकार का बड़ा फैसला, बदलेगी शिक्षा नीति, जानिए पूरी डिटेल्स"

Post a Comment

प्रेरकप्रसंग

latest